राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय।
जो सुख साधु संग में, सो बैकुंठ न होय॥
राम ने बुलावा भेजा तो कबीर रो पड़े। जो सुख साधुओं की संगति में है, वह बैकुंठ में भी नहीं। सत्संग का आनंद स्वर्ग से भी बड़ा है।
सत्संग और संगति