राम वियोगी तन बिकल, ताहि न चीन्हे कोई।
तंबोली के पान ज्यूँ, दिन-दिन पीला होई॥
राम के वियोग में शरीर व्याकुल रहता है, पर इसे कोई पहचान नहीं पाता। वह तंबोली के पान की तरह दिन-प्रतिदिन पीला पड़ता जाता है।
प्रेम और विरह