साहिब तेरी साहिबी, सब घट रही समाय।
ज्यों मेहँदी के पात में, लाली रखी न जाय॥
हे स्वामी! तुम्हारी प्रभुता हर हृदय में समाई हुई है। जैसे मेहँदी के हरे पत्ते में छिपी लाली छिपाए नहीं छिपती, वैसे ही तुम्हारी उपस्थिति हर कण में झलकती है।
उपदेश और चेतावनी