साकट कहा न कहि चलै, सुनहा कहा न खाय।
जो कौवा मठ हगि भरै, तो मठ को कहा नशाय॥
नास्तिक क्या नहीं कह डालता और कुत्ता क्या नहीं खा जाता? पर कौआ मठ पर बीट कर दे तो मठ का क्या बिगड़ता है? निंदा से श्रेष्ठता घटती नहीं।
सत्संग और संगति