सिंह अकेला बन रहे, पलक-पलक कर दौर।
जैसा बन है आपना, तैसा बन है और॥
सिंह वन में अकेला ही रहता है और निर्भय होकर विचरता है। उसके लिए अपना वन हो या पराया, सब बराबर है। आत्मबल वाला व्यक्ति कहीं भी अकेला और निर्भय रह सकता है।
उपदेश और चेतावनी