सुरति करौ मेरे साइयाँ, हम हैं भोजन माँहि।
आपे ही बहि जाहिंगे, जौ नहिं पकरौ बाँहि॥
हे मेरे स्वामी, मेरी सुध लो—मैं तो काल के भोजन में पड़ा हूँ। यदि तुमने बाँह न पकड़ी तो अपने आप बहा चला जाऊँगा।
काल और मृत्यु