तरुवर जड़ से काटिया, जबै सम्हारो जहाज।
तारै पर बोरे नहीं, बाँह गहे की लाज॥
वृक्ष जड़ से काटा गया, फिर भी उसने जहाज बनकर सबको तारा और किसी को डुबोया नहीं। जिसने बाँह पकड़ी, उसकी लाज निभाना यही है।
सत्संग और संगति