तीरथ करि-करि जग मुवा, डूंधै पाणी न्हाइ।
रामहि राम जपंता, काल घसीटया जाइ॥
तीर्थ कर-करके और गंदे पानी में नहाकर सारा जग मर गया। राम-राम रटते हुए भी काल उन्हें घसीटकर ले जाता है—क्रिया भर से भीतर नहीं बदलता।
काल और मृत्यु