बानी से पहचानिये, साम चोर की घात।
अंदर की करनी से सब, निकले मुँह की बात॥
मनुष्य की पहचान उसकी वाणी से होती है—सज्जन की भी और चोर की भी। भीतर जो करनी और भाव होते हैं, वे ही मुख से बाहर निकल आते हैं। वाणी भीतर का दर्पण है।
वाणी और व्यवहार