जैसी मुख तै नीकसै, तैसी चाले चाल।
पार ब्रह्म नेड़ा रहै, पल में करै निहाल॥
जैसा मुख से निकले वैसी ही चाल भी हो—कथनी और करनी एक हों। तब परब्रह्म पास ही रहते हैं और पल भर में निहाल कर देते हैं।
उपदेश और चेतावनी