ज्यों नैनन में पूतली, त्यों मालिक घर माँहि।
मूर्ख लोग न जानिए, बाहर ढूँढ़त जाहिं॥
जैसे आँखों के भीतर पुतली रहती है, वैसे ही मालिक इस देह-घर में ही बसता है। मूर्ख लोग यह नहीं जानते और उसे बाहर ढूँढ़ने निकल जाते हैं।
उपदेश और चेतावनी