कागा काको धन हरे, कोयल काको देय।
मीठे शब्द सुनाय के, जग अपनो कर लेय॥
कौआ किसी का धन नहीं छीनता और कोयल किसी को कुछ देती नहीं। फिर भी कोयल मीठे बोल से सारा जग अपना बना लेती है। वाणी की मिठास ही लोगों को जोड़ती है।
वाणी और व्यवहार