कबीर विषधर बहु मिले, मणिधर मिला न कोय।
विषधर को मणिधर मिले, विष तजि अमृत होय॥
विष धारण करने वाले तो बहुत मिले, पर मणि धारण करने वाला कोई नहीं मिला। यदि विषधर को मणिधर मिल जाए तो विष छूटकर अमृत हो जाए।
सत्संग और संगति