पदारथ पेलि करि, कंकर लीया हाथि।
जोड़ी बिछटी हंस की, पड़्या बगां के साथि॥
अनमोल वस्तु को ठुकराकर हाथ में कंकड़ ले लिया। हंसों की जोड़ी छूट गई और बगुलों के साथ जा पड़े। कुसंग में पड़कर श्रेष्ठ संग खो दिया।
सत्संग और संगति