निंदक नियरे राखिये, आँगन कुटि छबाय।
बिन पाणी बिन सबुना, निरमल करै सुभाय॥
निंदा करने वाले को अपने पास ही रखो, आँगन में कुटिया बनवा दो। वह बिना पानी और साबुन के ही तुम्हारे स्वभाव को निर्मल कर देगा।
सत्संग और संगति