शब्द विचारे पथ चलै, ज्ञान गली दे पाँव।
क्या रमता क्या बैठता, क्या गृह कंदला छाँव॥
जो शब्द का विचार करके मार्ग पर चले और ज्ञान की गली में पाँव रखे—उसके लिए घूमना या बैठना, घर या वन की छाया, सब बराबर है।
ज्ञान और विवेक