सिंहों के लेहँड नहीं, हंसों की नहीं पाँत।
लालों की नहिं बोरियाँ, साध न चलै जमात॥
सिंहों के झुंड नहीं होते, हंसों की पंक्तियाँ नहीं लगतीं और लालों की बोरियाँ नहीं भरतीं। इसी तरह सच्चे साधु भीड़ में नहीं चलते।
सत्संग और संगति