तब लग तारा जगमगे, जब लग उगे न सूर।
तब लग जीव जग कर्मवश, ज्यों लग ज्ञान न पूर॥
जब तक सूर्य नहीं उगता तभी तक तारे टिमटिमाते हैं। इसी तरह जब तक पूर्ण ज्ञान का उदय नहीं होता, तब तक जीव कर्मों के बंधन में बँधा संसार में भटकता रहता है।
ज्ञान और विवेक